समाज के पास कई सारी प्राथमिकतायें है,जिन पर समस्त समाज कार्य कर रहा है। उनके प्रति हम कितने प्रतिबद्ध है, यह हमको देखना है।
Sunday, December 19, 2010
बदलाव और बिखराव
Sunday, October 24, 2010
जंगल और समाज
Friday, October 15, 2010
कोमोंवेल्थ का आनंद
Friday, July 16, 2010
भारत और पाकिस्तान में बातचीत क्यों ?
Monday, April 6, 2009
लक्ष्य समाज सुधार का, क्यों नही.
रवि अजितसरिया
Sunday, March 29, 2009
बनती बिगड़ती सामाजिक मान्यताये
Thursday, March 26, 2009
आम चुनाव में हम
जय देश ।
रवि अजितसरिया
Saturday, February 7, 2009
जबाबदेही क्यों नही?
Tuesday, February 3, 2009
क्यो समाज में बदलाव की जरुरत होती है?
Monday, October 20, 2008
सकारात्मक सोच को एक रास्ते की जरूरत है l
कभी किसी को मुक्कमल जहाँ नही मिलता , यह बात समाज में भी लागू होती है। हम सोचते कुछ है और होता कुछ और है। समाज में बने रहने के लिए नए नए विचारो का प्रवाह जरूरी है। यह भी सत्य है कि हर किए गए कार्य के सकारात्मक रेजुल्ट्स नही मिलते, पर यह मतलब नही कि हम कार्य करना बंध कर दे , बल्कि हमें दुगनी ताकत के साथ ऐसी कार्य करने चाहिय , जिससे समाज की सकारात्मक उर्जा सही जगह लगे और समाज का कुछ भला हो सके। ज्यादातर मामलो में समाज के लोग सस्ती लोक्प्रियार्ता हासिल करने के लिए कार्य करते है, और ऐसा प्रतीत होने लगता है कि यही सबसे अच्हा कार्य है। पर हकीकत में ऐसा नही होता । नकारत्मक कार्य समाज के युवाओ को गुमराह करते है, उनको एक ऐसे रेस्त्रे पर ले कर जाते है जो किसी भी मंजिल की ओर नही लेके जाते , बलकी उनकी उर्जा का दुरूपयोग होता है। क्या ऐसे कर सकते है की हम युवाओ की उर्जा को एक सकारात्मक रस्ते की और ले कर जाए। आप जरा सोचिये
रवि अजितसरिया
20102008