Friday, July 3, 2026

असम में मारवाड़ी समाज का प्रकल्प श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा

 

श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय में हिमंत

श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय के 110 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा फैंसी बाज़ार के माछखोवा स्थित आईटीए सेंटर में आये थे l उन्होंने अपने भाषण में मारवाड़ी लोगों का 400 वर्षों का असम में बसावट का इतिहास तो रखा ही, साथ ही में साफ़ शब्दों में यह कहा कि मारवाड़ी को अगर कोई गाली देता है और उन्हें अना असमिया कहता है, तो उन्हें दुःख होता है l असम के साथ उनका गहरा और पुराना संबंध है, और 470 वर्ष पहले आये प्रथम मारवाड़ी सरदार विजय सिंह का उन्होंने जिक्र भी किया l इस कार्यक्रम में करीब एक हज़ार लोग आये थे, ज्यादातर मारवाड़ी समाज के लोग थे l उनके समक्ष राज्य के मुख्यमंत्री का मारवाड़ियों के अवदान को स्वीकारना इस बात की पुष्टि करता है कि मारवाड़ी एक जनगोष्ठी के रूप में असम में रह रही है और असम के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है l उन्होंने यह भी कहा कि मारवाड़ी समाज अपने उत्कृष्ट व्यावसायिक कौशल और अपनी मजबूत परोपकारी एवं सामाजिक सेवा की परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं l इन्हें भारत में सबसे बड़े परोपकारी समुदायों में से एक माना जाता है। उन्होंने बेहद साफ़ शब्दों में कहा कि आज मारवाड़ी असम के सामाजिक तानेबाने का हिस्सा बन गए हैं l श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय मारवाड़ी समाज का एक सेवा प्रकल्प है, जिसकी प्रसिद्धि इतर समाज में इसलिए है क्योंकि बेहद कम खर्चे में यहाँ रोगियों का उपचार होता है l एक समय में जब मारवाड़ी मेटरनिटी हॉस्पिटल खुला था, तब सामान्य रूप से बच्चा होने पर वार्ड में भारती होने पर केवल पांच सो रुपये ही खर्च आता था l आज भी वार्ड में उपचार का खर्च काफी कम ही नहीं, बल्कि उसमे उत्कृष्ट मानदंड का इलाज भी करवाया जाता है l फैंसी बाज़ार स्थित आउटडोर डिस्पेंसरी में तो दस रुपये में रोगियों को देखा जा रहा हैं l इत्तनी बड़ी सुविधा से लेश श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय अपनी स्थापना के 110 वर्ष पुरे कर रहा है l कोई भी संस्थान जब अपनी स्थापना के सौ वर्ष अतिक्रम कर लेता है, तब उसके द्वारा किये गए कार्यों की समीक्षा तो समस्त समाज करता ही है, साथ ही उसके स्थापना के समय जिन महानुभावों ने अपना योगदान दिया था, उनके प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापन करता है l आज असम का मारवाड़ी समाज आज इस बात पर गर्व कर रहा है कि फैंसी बाज़ार गुवाहाटी स्थित श्री मारवाड़ी दातब्य औषधालय९(मारवाड़ी हॉस्पिटल के नाम से आजकल इसे संबोधित किया जाता है), आज अपने स्थापना के एक सौ दस वर्ष मना रहा है l इस एक सौ दस वर्ष की यात्रा इस बात के भी संकेत देती है कि इस अहिन्दी प्रदेश में भी परोपकार के उद्देश्य से एक समाज ने ऐसे प्रकल्प की स्थापना की है, जिसका लाभ समस्त लोगों को हो रहा है l फैंसी बाज़ार डिस्पेंसरी में हर वर्षग लगभग 72 हज़ार रोगियों का उपचार केवल दस रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस के साथ किया जाता हैं l राज्य में जहाँ बड़े बड़े सरकारी अस्पतालों में रोगोयों का इलाज निशुल्क होता बताया जाता है, इस डिस्पेंसरी में सही में केवल दस रुपये में कुशल डोक्टरों द्वारा रोगियों को देखा जाता हैं l अगर समाज सेवा की मिशाल देखनी है, तब किसी को फैंसी बाज़ार स्थित मारवाड़ी दातव्य औषधालय आना चाहिये. जहाँ निशुल्क रक्त सर्करा जांच भी रोजाना सुबह 7 बजे से 9 बजे तक की जाती है l एक धर्मार्थ करने वाली जाति की मानवता की सेवा करने की एक सदी पुरानी जीवित विरासत है और हम सभी इसे समाज के लिए समय पर उन्नयन और प्रासंगिकता के लिए हमारे व्यक्तिगत योगदान के माध्यम से संरक्षित कर सकते हैं। समय के साथ मारवाड़ी हॉस्पिटल ने अपनी सेवा का विस्तार भी किया हैं l कई दानदाताओं ने अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत हॉस्पिटल को नए विस्तार में मदद भी की हैं l हॉस्पिटल ने हाल के दिनों में एक साधन संपन्न कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट की शुरुवात की है l उसने एक एम्आरआई मशीन की भी स्थापना की है l इसके अलावा, प्रसूति गृह को साधन संपन्न बनाया गया है, जिसका एक मात्र उद्देश्य है, हॉस्पिटल में रोगियों को पर्याप्त सुसिधा मिले l यहाँ एक आइविएफ़ केंद्र शुरू करने की दिशा में भी काम हो रहा है, जिसकी शुरुवात बहुत जल्दी होने वाली है l किसी भी हॉस्पिटल में इमरजेंसी विभाग उसकी रीढ़ की हड्डी होती है l मारवाड़ी हॉस्पिटल ने अपनी इमरजेंसी विभाग का विस्तार करने की दिशा में कदम बढाया है l अगर हम हॉस्पिटल के मिशन की ओर ध्यान देते है, तब पाते है कि यह हॉस्पिटल जाति, पंथ और धर्म से परे, मानवता की सेवा करता है, और उचित मूल्य पर बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना एवं संगठन के समग्र विकास को बनाए रखने के लिए कार्यक्षमता में लगातार सुधार करना तथा  विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तार करना और समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर सब्सिडी देना। पिछले बीस वर्षों में चिकित्सा के क्षेत्र में आई क्रांति के साथ एकरूप होने के लिए हॉस्पिटल ने आधुनिक मशीनों की स्थापना की है, जिससे बेहतर इलाज हो सके l इसने अपने लिए एक कुछ उच्च मापदंड बना लिए है, जिसके लिए प्रबंधन की टीम पूरी तन्मयता से कार्य कर कर रही है l रोगियों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं अनुसार उच्च गुणवत्ता सेवा प्रदान करना। बेहतरीन सेवा के माध्यम से रोगियों की संतुष्टि सुनिश्चित करना, और रोगियों की गरिमा तथा अधिकारों की रक्षा करना। मुख्यमंत्री के संबोधन का वीडियो पुरे असमवासियों ने वायरल हुए विडियो के माध्यम से देखा है, जिसमे उन्होंने 10 से ज्यादा ऐसे मारवाड़ियों के नाम लिए, जो असमिया भाषा संस्कृति को समृद्ध कर रहे हैं l मुख्यमंत्री द्वारा मारवाड़ी समाज का लेखाजोखा पेश करना एक एतिहासिक घटना इसलिए मानी जाएगी, क्योंकि इस वक्त समूचे असम में जतियातावादी सोच वाले संगठनों ने मारवाड़ी के विरोध में मोर्चा खोल रखा हैं l मुख्यमंत्री के इस भाषण से उनको समुचित जबाब मिल गया है l

किसी भी समाज के लिए संयम रख कर इस तरह से सेवा प्रकल्पों को चलाते रहना, इस बात को दर्शाता है कि असम में मारवाड़ी समाज सिर्फ व्यवसाय के लिए ही नहीं आया हैं l उसकी यहाँ के समाज के प्रति भी कुछ कर्तव्य, जिसे वह बखूबी निभा रहा है l श्री मारवाड़ी दातव्य औषधालय यही कार्य कर रहा है l   

Saturday, March 7, 2026

नस्लीय टिप्पणियां दिल में छेद कर देती हैं

 

हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल की रहने वाली तीन छात्राओं के साथ जबरदस्त दुर्व्यवहार किया गया l वहां रहने वाले एक दंपति ने पूर्वोतर के लोगों के ऊपर भद्दी नस्लीय टिप्पणियां की, जिससे समूचे नार्थ ईस्ट के लोग इस समय महिला द्वारा की गई नस्लीय टिप्पणियों से आहत हैं l यह उनकी पहचान और संस्कृति पर सीधा प्रहार है, और उनकी नागरिकता पर वार है l तुम लोग नार्थ ईस्ट के हो ना..., तुम लोग ऐसे ही हो..l यह बात बार बार सुनना, इस बात के संकेत देता है कि कही ना कही एक ग्रंथि यह कह रही है कि नार्थ एस्ट के लोग भारत के मेनलैंड के लोगों से ज्ञान और शिक्षा के मायने में काफी नीचे हैं l इस तरह से पूर्वोत्तर के लोगों का मूल्यांकन करना, यहाँ के लोगों के प्रति एक विचलित मानसिकता को दर्शाता है l जब मालवीय नगर की उस महिला ने यह कहा कि नोर्थ ईस्ट की लडकियां मसाज पार्लर में काम करती है, हमारे यहाँ की नहीं.., तब उसने एक विभाजन की एक बड़ी लकीर खींच दी है, और एक निर्णय सुना दिया कि मसाज पार्लर नार्थ ईस्ट के लोगों की पहचान हैं l उनके अस्तित्व को एकाएक संकट में डाल दिया, दिल्ली की इस महिला रूबी जैन ने l यह एक संयुक्त निर्णय था, जिसे समूचे पूर्वोत्तर को एक अदालत में खड़ा कर दिया l इतना ही नहीं जिस मकान में तीनों अरुणाचली युवतियां रह रही थी, उसके दलाल ने बिना कुछ जाने तीनों युवतियों से बिल्डिंग खाली करने का भी निर्णय तुरंत सुना दिय l पूर्वोत्तर के बारे में अभी भी उत्तर भारत के लोगों को भ्रम और भ्रांतियां बनी हुई हैं l ज्यादातर लोगों को पूर्वोत्तर के बारे में पताही नहीं l यहाँ की संस्कृति, वेश-भूषा और भाषा कैसी है, उनको नहीं पता l बस पता है कि नार्थ ईस्ट कहाँ है, यह पता नहीं है कि नार्थ ईस्ट कैसा है और वहाँ के लोग कैसे हैं l कभी कभी ऐसा भी लगता है कि शेष भारत के लोगों को यहाँ की जमीनी हकीकत के बारे में जानने की इच्छा ही नहीं है, भूगोल और व्याकरण की बात तो छोड़ ही दीजिये है l नस्लीय टिपण्णी करना भारतीय लोगों का स्ववभाव बन चूका हैं l बंगाली, बिहारी, मारवाड़ी...इस तरह से किसी को संबोधन करना किसी के लिए भी एक आम बात हैं l जैसे नेपाली कह कर किसी को बुलाना, उसके चरित्र को दर्शाता है, एकाएक नेपाल से आये हुए एक युवक की छवि आँखों के आगे तैरने लगी है l मारवाड़ी कह कर सबोधन करना, इस बात को इंगित करता है कि व्यक्ति राजस्थान से उठ कर दुसरे प्रदेश में बस गया है और एक आगंतुक है l ऐसे हजारों वाकये घटित हुए है, जिनसे यह पता चलता है कि मनुष्य स्वाभाव से ही जातिवाद को बड़ी सिद्द्दत से पालन करता है और ताउम्र उसी को मानते हुए चलता है l इस जड़ता को दर्शाया है,दिल्ली के उस दंपति ने, और पुरे नार्थ ईस्ट के लोगों को ही कठघड़े में खड़ा कर दिया l इतना ही नहीं, उन्होंने नार्थ ईस्ट के लोगों को ‘एक गंदगी है की संज्ञा भी दे डाली l पूर्वोत्तर के लोगों को पुरे भारत में एक अलग कौम के रूप में देखा जाता है, जो उनकी वेशभूषा और संस्कृति तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी एक अलग इमेज गढने की चेष्टा भी की जाती हैं l उनके चरित्र हनन की कौशिश भी की जाती हैं l एक बार यूरो कप फाइनल में इंग्लैंड की हार के पश्चात उनके तीन काले खिलाडियों पर जातिय और नस्लभेदी टिप्पणियों ने समूची मानव जाति के समक्ष यह प्रश् ला कर खड़ा कर दिया कि कही इक्कीसवी सदी की समूची मानव जाति नस्ल, रंग, वर्ण, जाति, ऊँचे, नाटे, सफ़ेद, काले, कथई, नोर्डिक, अल्पाइन, मोंग्लोइड, ऑस्ट्रिक, जैसी नस्लों में बंटी हुई तो नहीं ? इस प्रश्न के पूछे जाने में कई संवेदनाएं छिपी हुई है l इतना ही नहीं, जब इटली के फेंस, स्टेडियम से जब जा रहे थे, तब उनपर जातिय फब्तियां कसी गयी और उनको धक्का भी दिया गया l इंग्लैंड ने अपने ही तीन काले खिलाडियों पर नस्लीय टिपण्णी कर यह साबित कर दिया कि विकसित या विकासशील कुछ भी नहीं होता, मनुष्य जाति में पृथकता कूट कूट कर भरी हुई है l वें झुण्ड में जरुर रहते है, पर झुंडों में भी छोटे छोटे झुण्ड बना लेते हैं l अलग अलग भाषा-भाषियों की तो बात ही छोड़ दीजिये, रंग का भेद अभी भी मनुष्य ह्रदय में विराजमान है l आमिर गरीब के भेद को समझा जा सकता है, घोर गरीबी विद्रोह पैदा करती है l कुछ लोगों के पास अकूट सम्पति जमा होने पर उनके प्रति घृणा सनेह सनेह पनप सकती है l दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही हुवा l तीनों युवतियों के खिलाफ, अश्लील शब्दों की बौछार कर दी गयी, उनको धक्का दिया गया और राजनितिक प्रभाव डालने की कौशिश की गयी l यह उनकी घृणा है, पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति l उनको निचले पायदान पर रखा जाता हैं l इस बात को समझना होगा कि पूर्वोत्तर के लोग अपनी कद काठी की वजह से भीड़ में पहचाने जाते हैं l यहाँ के सीधे सरल लोग देखने में भी सुंदर होते है और मीठी बोली बोलते हैं l भौगोलिक दुरी होने की वजह से यहाँ ऐसे लाखों लोग है, जिन्होंने अभी भी पूर्वोत्तर की भूमि के बाहर कदम नहीं रखा l दिल्ली कहाँ है, उनको नहीं पता l ऐसे लाखों पूर्वोत्तर के युवा है, जो देश भर में रोजगार करते है, जिनको जातिवाद का दंश सहना पड़ता हैं l दिल्ली में नार्थ ईस्ट के लाखों लोग रहते हैं l उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए या रोजगार के लिए या फिर व्यापार के लिए हर वर्षा लाखों लोग दिल्ली औरे दुसरे शहरों की ओर रुख करते हैं l शुक्रवार को निकले हुए यूपीएससी के परिणाम में नार्थ ईस्ट के 11 लोग उतीर्ण हुए है, जिनमे मणिपुर से 6 लोग शामिल हैं l नार्थ ईस्ट के लोगों के उपर नस्लीय टिपण्णी का वार सिर्फ अरुनाचाली युवतियों पर नहीं पड़ा, बल्कि पूर्वोत्तर में रहने वाले इत्तर भाषियों पर भी पड़ा है, जिन्हें दिल्ली के दंपति के दुर्व्यवहार की वजह से ताने सुनने पड़ रहे हैं l पूर्वोत्तर के सभी जातीय समूहों ने न्याय की मांग करते हुए यह कहा कि लड़ाई दो पड़ोसियों के बीच की नहीं है, बल्कि यह एक पहचान और अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता l