हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर में अरुणाचल
की रहने वाली तीन छात्राओं के साथ जबरदस्त दुर्व्यवहार किया गया l वहां रहने वाले एक दंपति ने पूर्वोतर के लोगों के ऊपर
भद्दी नस्लीय टिप्पणियां की, जिससे समूचे नार्थ ईस्ट के लोग इस समय महिला द्वारा
की गई नस्लीय टिप्पणियों से आहत हैं l यह उनकी पहचान और
संस्कृति पर सीधा प्रहार है, और उनकी नागरिकता पर वार है l तुम लोग नार्थ ईस्ट के हो ना..., तुम लोग ऐसे ही हो..l यह बात बार बार सुनना, इस बात के संकेत देता है कि
कही ना कही एक ग्रंथि यह कह रही है कि नार्थ एस्ट के लोग भारत के मेनलैंड के लोगों
से ज्ञान और शिक्षा के मायने में काफी नीचे हैं l इस तरह से
पूर्वोत्तर के लोगों का मूल्यांकन करना, यहाँ के लोगों के
प्रति एक विचलित मानसिकता को दर्शाता है l जब मालवीय नगर की
उस महिला ने यह कहा कि नोर्थ ईस्ट की लडकियां मसाज पार्लर में काम करती है, हमारे यहाँ की नहीं.., तब उसने एक विभाजन की एक बड़ी
लकीर खींच दी है, और एक निर्णय सुना दिया कि मसाज पार्लर
नार्थ ईस्ट के लोगों की पहचान हैं l उनके अस्तित्व को एकाएक
संकट में डाल दिया, दिल्ली की इस महिला रूबी जैन ने l यह एक
संयुक्त निर्णय था, जिसे समूचे पूर्वोत्तर को एक अदालत में
खड़ा कर दिया l इतना ही नहीं जिस मकान में तीनों अरुणाचली
युवतियां रह रही थी, उसके दलाल ने बिना कुछ जाने तीनों
युवतियों से बिल्डिंग खाली करने का भी निर्णय तुरंत सुना दिय l पूर्वोत्तर के बारे में अभी भी उत्तर भारत के लोगों को भ्रम और
भ्रांतियां बनी हुई हैं l ज्यादातर लोगों को पूर्वोत्तर के
बारे में पताही नहीं l यहाँ की संस्कृति, वेश-भूषा और भाषा कैसी है, उनको नहीं पता l बस पता है कि नार्थ ईस्ट कहाँ है, यह पता नहीं है
कि नार्थ ईस्ट कैसा है और वहाँ के लोग कैसे हैं l कभी कभी
ऐसा भी लगता है कि शेष भारत के लोगों को यहाँ की जमीनी हकीकत के बारे में जानने की
इच्छा ही नहीं है, भूगोल और व्याकरण की बात तो छोड़ ही दीजिये
है l नस्लीय टिपण्णी करना भारतीय लोगों का स्ववभाव बन चूका
हैं l बंगाली, बिहारी, मारवाड़ी...इस तरह से किसी को संबोधन करना किसी के लिए भी एक आम बात हैं l जैसे नेपाली कह कर किसी को बुलाना, उसके चरित्र को दर्शाता
है, एकाएक नेपाल से आये हुए एक युवक की छवि आँखों के आगे तैरने
लगी है l मारवाड़ी कह कर सबोधन करना, इस
बात को इंगित करता है कि व्यक्ति राजस्थान से उठ कर दुसरे प्रदेश में बस गया है और
एक आगंतुक है l ऐसे हजारों वाकये घटित हुए है, जिनसे यह पता चलता है कि मनुष्य स्वाभाव से ही जातिवाद को बड़ी सिद्द्दत
से पालन करता है और ताउम्र उसी को मानते हुए चलता है l इस
जड़ता को दर्शाया है,दिल्ली के उस दंपति ने, और पुरे नार्थ
ईस्ट के लोगों को ही कठघड़े में खड़ा कर दिया l इतना ही नहीं, उन्होंने नार्थ ईस्ट के लोगों को ‘एक गंदगी है’ की
संज्ञा भी दे डाली l पूर्वोत्तर के लोगों को पुरे भारत में
एक अलग कौम के रूप में देखा जाता है, जो उनकी वेशभूषा और
संस्कृति तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी एक अलग इमेज
गढने की चेष्टा भी की जाती हैं l उनके चरित्र हनन की कौशिश
भी की जाती हैं l एक बार यूरो कप फाइनल में इंग्लैंड की हार
के पश्चात उनके तीन काले खिलाडियों पर जातिय और नस्लभेदी टिप्पणियों ने समूची मानव
जाति के समक्ष यह प्रश् ला कर खड़ा कर दिया कि कही इक्कीसवी सदी की समूची मानव जाति
नस्ल, रंग, वर्ण, जाति, ऊँचे, नाटे, सफ़ेद, काले, कथई, नोर्डिक, अल्पाइन,
मोंग्लोइड, ऑस्ट्रिक, जैसी नस्लों में बंटी हुई तो नहीं ? इस प्रश्न के पूछे जाने
में कई संवेदनाएं छिपी हुई है l इतना ही नहीं, जब इटली के फेंस, स्टेडियम से जब जा
रहे थे, तब उनपर जातिय फब्तियां कसी गयी और उनको धक्का भी दिया गया l इंग्लैंड ने
अपने ही तीन काले खिलाडियों पर नस्लीय टिपण्णी कर यह साबित कर दिया कि विकसित या
विकासशील कुछ भी नहीं होता, मनुष्य जाति में पृथकता कूट कूट कर भरी हुई है l वें
झुण्ड में जरुर रहते है, पर झुंडों में भी छोटे छोटे झुण्ड बना लेते हैं l अलग अलग
भाषा-भाषियों की तो बात ही छोड़ दीजिये, रंग का भेद अभी भी मनुष्य ह्रदय में
विराजमान है l आमिर गरीब के भेद को समझा जा सकता है, घोर गरीबी विद्रोह पैदा करती
है l कुछ लोगों के पास अकूट सम्पति जमा होने पर उनके प्रति घृणा सनेह सनेह पनप सकती
है l दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही हुवा l तीनों युवतियों के
खिलाफ, अश्लील शब्दों की बौछार कर दी गयी, उनको धक्का दिया गया और राजनितिक प्रभाव डालने की कौशिश की गयी l यह उनकी घृणा है, पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति l उनको निचले पायदान पर रखा जाता हैं l इस बात को
समझना होगा कि पूर्वोत्तर के लोग अपनी कद काठी की वजह से भीड़ में पहचाने जाते हैं l यहाँ के सीधे सरल लोग देखने में भी सुंदर होते है और मीठी बोली बोलते हैं
l भौगोलिक दुरी होने की वजह से यहाँ ऐसे लाखों लोग है, जिन्होंने अभी भी पूर्वोत्तर की भूमि के बाहर कदम नहीं रखा l दिल्ली कहाँ है, उनको नहीं पता l ऐसे लाखों पूर्वोत्तर के युवा है, जो देश भर में
रोजगार करते है, जिनको जातिवाद का दंश सहना पड़ता हैं l दिल्ली में नार्थ ईस्ट के लाखों लोग रहते हैं l
उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए या रोजगार के लिए या फिर व्यापार के लिए हर वर्षा
लाखों लोग दिल्ली औरे दुसरे शहरों की ओर रुख करते हैं l
शुक्रवार को निकले हुए यूपीएससी के परिणाम में नार्थ ईस्ट के 11 लोग उतीर्ण हुए है, जिनमे मणिपुर से 6 लोग शामिल हैं l नार्थ ईस्ट के
लोगों के उपर नस्लीय टिपण्णी का वार सिर्फ अरुनाचाली युवतियों पर नहीं पड़ा, बल्कि पूर्वोत्तर में रहने वाले इत्तर भाषियों पर भी पड़ा है, जिन्हें दिल्ली के दंपति के दुर्व्यवहार की वजह से ताने सुनने पड़ रहे हैं
l पूर्वोत्तर के सभी जातीय समूहों ने न्याय की मांग करते हुए
यह कहा कि लड़ाई दो पड़ोसियों के बीच की नहीं है, बल्कि यह एक पहचान
और अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता l